सड़क की मांग पर जारी धरना प्रदर्शन में पहुंचे PWD अधिकारी — ग्रामीणों को धमकाने के आरोप पर फंसे, जवाब देने में हुए असमर्थ
जैतपुर। रसमोहनी ग्राम और सागरटोला में सड़क निर्माण को लेकर जारी ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन अब और गरमाता जा रहा है। इस मामले में PWD विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत करने की कोशिश की। लेकिन हालात उस समय बिगड़ गए जब ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि PWD अधिकारी ने उन्हें धमकाया और कहा कि “अगर शिकायत करनी है तो 181 हेल्पलाइन पर कर दो, नहीं तो हम भी तुम्हारे खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा देंगे।”
ख़बरटैप की टीम जब मौके पर मौजूद थी, तब हमने इस मुद्दे पर PWD अधिकारी से सीधा सवाल किया — “क्या आपने ग्रामीणों को धमकाया?” इस सवाल पर अधिकारी साफ तौर पर मुकर गए, लेकिन उनके चेहरे की घबराहट और हकलाहट सब कुछ बयां कर रही थी।
इसके बाद जब हमने उसी ग्रामीण को सामने बुलाया, तो उसने कैमरे के सामने खुलकर कहा —
> “हां, हमें धमकाया गया था। अधिकारी ने साफ कहा कि ज्यादा बोलोगे तो तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई होगी।”
इस बयान के बाद PWD अधिकारी जवाब देने में असमर्थ दिखे और चुप्पी साध ली। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर जनता अपनी समस्या उठाने पर ही धमकाई जाएगी, तो आखिर उसकी मदद कौन करेगा?
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की दुर्दशा के कारण लोग आए दिन घायल हो रहे हैं। उपसरपंच भी टूटा पैर लेकर धरने में बैठे हैं, लेकिन विभाग और प्रशासन की संवेदनहीनता कम होने का नाम नहीं ले रही।
इस पर जब PWD अधिकारी से पूछा गया कि आखिर सड़क क्यों नहीं बनी, तो उन्होंने सफाई दी कि “लोगों के घर का पानी सड़क पर गिरता है, जिससे नुकसान होता है।” इस पर ग्रामीणों ने तीखा जवाब देते हुए कहा —
> “अगर घर का पानी सड़क पर आ रहा है तो ये भी प्रशासन की नाकामी है। घर के पानी से न तो तालाब बनते हैं और न गड्ढे, ये तो सालों की लापरवाही का नतीजा है।”
धरना स्थल पर अब भी ग्रामीण डटे हुए हैं और कलेक्टर के आने की मांग पर अड़े हैं। प्रशासन के समझाने के बावजूद लोग जाम हटाने को तैयार नहीं हैं।
अब सवाल यही है —
क्या प्रशासन सच में समस्या सुलझाने मैदान में उतरेगा या फिर इस बार भी ‘जुमले’ और ‘धमकियों’ से ही जनता को शांत किया जाएगा?

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