“खाद मांगा… तो तहसीलदार ने जड़ दिया थप्पड़! वायरल वीडियो ने खोल दी सत्ता के घमंड की पोल”
मध्य प्रदेश के सागर ज़िले के देवरी तहसील से इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक वीडियो सामने आया है। बताया जा रहा है कि खाद वितरण के दौरान तहसीलदार प्रीति रानी चौरसिया ने एक किसान को थप्पड़ जड़ दिया। वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर आया, पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। किसान संगठनों ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि “हम खाद मांगेंगे तो क्या थप्पड़ खाएंगे?”
घटना देवरी कृषि उपज मंडी प्रांगण की बताई जा रही है। सोमवार सुबह यहां बड़ी संख्या में किसान खाद लेने पहुंचे थे। बताया गया कि मंडी में सुबह 4 बजे से ही सैकड़ों किसान लाइन में खड़े थे, ताकि उन्हें समय पर यूरिया और डीएपी की बोरी मिल सके। लेकिन भीड़ बढ़ती गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी दौरान टोकन वितरण के दौरान जब धक्का-मुक्की हुई, तो तहसीलदार प्रीति रानी चौरसिया ने एक किसान को सामने से थप्पड़ जड़ दिया।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किसान शांत खड़ा है और तहसीलदार उसके पास जाकर थप्पड़ मार देती हैं। मौके पर मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल क्लिप में पीछे खड़े किसान दंग रह जाते हैं, जबकि कुछ लोग “मैडम ने थप्पड़ क्यों मारा?” कहते हुए हैरानी जताते दिख रहे हैं।
घटना के बाद पूरे इलाके में गुस्से का माहौल है। कई किसान संगठनों ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा है कि “सरकारी अधिकारी जनता के सेवक हैं, मालिक नहीं।” किसान नेताओं ने मांग की है कि तहसीलदार को तुरंत निलंबित किया जाए और पीड़ित किसान से सार्वजनिक माफी मांगी जाए।
स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर ने संबंधित वीडियो की पुष्टि कर रिपोर्ट तलब की है। वहीं, तहसीलदार प्रीति रानी चौरसिया ने अपने बचाव में कहा कि भीड़ बेकाबू हो रही थी और थप्पड़ मारने का इरादा नहीं था — पर जनता इसे “अहंकार का नमूना” बता रही है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में खाद की किल्लत से किसानों में पहले से ही नाराज़गी है। कई जिलों से मारपीट और हंगामे की खबरें सामने आ चुकी हैं। देवरी की यह घटना किसानों की नाराज़गी को और भड़का सकती है।
सोशल मीडिया पर अब लोग प्रशासन की सख्त आलोचना कर रहे हैं। एक यूज़र ने लिखा, “किसान हमारे अन्नदाता हैं, उन्हें थप्पड़ नहीं सम्मान मिलना चाहिए।”
वहीं एक अन्य ने लिखा, “खाद के लिए परेशान किसान अब अधिकारी के अहंकार का भी सामना कर रहे हैं, ये शर्मनाक है।”
फिलहाल, देवरी की यह घटना केवल एक थप्पड़ की नहीं, बल्कि उस “सिस्टम” की झलक बन गई है, जहां जनता के सवालों का जवाब सत्ता के हाथों से मिलता है — वह भी थप्पड़ के रूप में।

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