Updated On: 14 Oct, 2025

राज्यपाल बोले – ‘जनता चाहती है राष्ट्रपति शासन!’ बंगाल में सियासी भूकंप, TMC बौखलाई”

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर गैंगरेप केस ने अब कानून से लेकर राजनीति तक को हिला दिया है। सोमवार को पीड़िता से मिलने पहुंचे राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने एक ऐसा बयान दिया जिसने पूरे राज्य की राजनीति में आग लगा दी। उन्होंने कहा – “बंगाल की जनता राष्ट्रपति शासन चाहती है।”
इस एक लाइन ने सियासी हलकों में हड़कंप मचा दिया है। क्या सच में बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगने वाला है? यही सवाल अब राज्य के हर कोने में गूंज रहा है।

राज्यपाल बोस ने दुर्गापुर के अस्पताल में पीड़िता से मुलाकात की, जहां उसका इलाज जारी है। पीड़िता ने उन्हें पूरी घटना की जानकारी दी। राज्यपाल ने कहा कि वे मामले की हर परत खुद देखेंगे और दोषियों को सख्त सजा दिलाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य में “कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक” है और यह संवैधानिक कार्रवाई की मांग करती है।

इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बवाल मच गया।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे “राजनीतिक चाल” बताया। पार्टी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, “राज्यपाल अनुभवी हैं, लेकिन बंगाल की जनता राष्ट्रपति शासन को स्वीकार नहीं करेगी। भाजपा के पास संसद में इतना बहुमत भी नहीं कि वह यह फैसला लागू करा सके।”

वहीं, भाजपा विधायक शंकर घोष ने पलटवार करते हुए कहा, “जब संविधान का संरक्षक ही यह बोले कि राज्य की स्थिति बदहाल है, तो समझ लीजिए प्रशासन मर चुका है। ममता सरकार जनता के भरोसे पर खरी नहीं उतरी।”

उधर, नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि गिरफ्तार पांच आरोपियों में से एक तृणमूल नेता का बेटा है। उन्होंने कहा, “जहां शासक ही शोषक बन जाएं, वहां कानून की नहीं, सत्ता की मनमानी चलती है।”

दुर्गापुर गैंगरेप मामले में पुलिस ने अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि घटना की रात पीड़िता को झांसा देकर बुलाया गया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि हुई है — पीड़िता के गुप्तांगों पर गहरे घाव और रक्तस्राव के निशान पाए गए हैं।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों से रातभर पूछताछ चली और घटनास्थल का रिकंस्ट्रक्शन (पुनर्निर्माण) कराया गया। दो आरोपियों को उनके घर भी ले जाया गया ताकि घटना के क्रम का पता लगाया जा सके।

अब बड़ा सवाल यही है — क्या यह मामला सिर्फ अपराध का है या इसके पीछे सत्ता की छाया भी है?
राज्यपाल के बयान ने माहौल को और गरमा दिया है। विपक्ष इसे “सिस्टम की नाकामी” बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष “संवैधानिक अतिक्रमण” का आरोप लगा रहा है।

बंगाल में यह केस अब सिर्फ एक गैंगरेप नहीं, बल्कि उस सवाल का प्रतीक बन गया है —
“क्या यहां इंसाफ मिलेगा, या फिर राजनीति एक बार फिर न्याय पर भारी पड़ेगी?”