दिवाली की शाम बुझ गया एक सितारा: असरानी नहीं रहे, आखिरी पोस्ट ने नम कर दीं आंखें
लेखक: देवकांत मिश्रा, स्थान: शहडोल
बॉलीवुड के चमकते सितारों में से एक, दिग्गज अभिनेता गोवर्धन असरानी अब हमारे बीच नहीं रहे। दिवाली की शाम जब पूरा देश दीपों की रौशनी में डूबा हुआ था, उसी समय हिंदी सिनेमा का यह चमकता सितारा हमेशा के लिए बुझ गया। 84 वर्ष की उम्र में, मुंबई के जूहू स्थित आरोग्य निधि अस्पताल में असरानी ने अंतिम सांस ली।
पिछले कुछ समय से असरानी उम्रजनित बीमारियों से जूझ रहे थे। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उनके चाहने वालों को उम्मीद थी कि वह एक बार फिर स्वस्थ होकर वापस आएंगे। लेकिन इस बार वे बस एक आखिरी संदेश देकर चले गए।
अंतिम पोस्ट: दो शब्द जो दिल छू गए
दिवाली की सुबह असरानी ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा – "हैप्पी दिवाली"। ये सिर्फ दो शब्द नहीं थे, बल्कि उनके फैंस के लिए आखिरी संदेश बन गए। किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह पोस्ट उनकी विदाई की सूचना बनकर सामने आएगी।
एक अभिनय यात्रा जो अमर हो गई
जयपुर में जन्मे असरानी ने मुंबई आकर जो मुकाम बनाया, वह लाखों कलाकारों के लिए प्रेरणा बना। 50 सालों से अधिक के करियर में उन्होंने 350 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।
‘शोले’ में जेलर का किरदार हो या ‘चुपके चुपके’, ‘बावर्ची’, ‘रफू चक्कर’, ‘कोशिश’, ‘अभिमान’ जैसी फिल्मों में उनका सहज हास्य – असरानी ने हर भूमिका में जान फूंकी।
वे सिर्फ अभिनेता ही नहीं, निर्देशक भी रहे। उन्होंने कई यादगार फिल्में बनाईं और एक संजीदा कलाकार के रूप में अपनी पहचान बनाई।
नम आंखों से विदाई
असरानी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित फिल्म जगत की कई हस्तियों ने गहरा शोक जताया। सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसक भावुक संदेशों के साथ उन्हें याद कर रहे हैं।
परिवार के मुताबिक, असरानी का अंतिम संस्कार गुपचुप तरीके से किया गया। उन्होंने पहले ही अपनी पत्नी से कहा था – "मेरी मौत को शोर मत बनने देना।"
असरानी भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके किरदार, उनकी मुस्कान और उनका अद्वितीय अंदाज हिंदी सिनेमा में हमेशा जीवित रहेगा। दिवाली की रौशनी में जब भी कोई "हैप्पी दिवाली" कहेगा, तो शायद किसी को असरानी की वो आखिरी स्टोरी याद आ जाएगी।

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