Updated On: 22 Oct, 2025

शहडोल में दो सगे भाइयों की निर्मम हत्या: दीपावली की खुशियां मातम में बदलीं, मरने से पहले युवक ने खोला हत्यारों का राज

दीपावली के बाद शहडोल जिले से ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। जमीनी विवाद के चलते दो सगे भाइयों की धारदार हथियारों से बेरहमी से हत्या कर दी गई, जबकि तीसरा युवक गंभीर हालत में अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। यह खौफनाक वारदात बुढ़ार थाना क्षेत्र के केशवाही चौकी अंतर्गत ग्राम बलबहरा की है।

मिली जानकारी के अनुसार, राहुल तिवारी और राकेश तिवारी, दीपावली के अगले दिन अपनी ऑटो पार्ट्स की दुकान में दिया जलाने पहुंचे थे। तभी गांव के ही अनुराग शर्मा अपने दस से अधिक साथियों — जिनमें नीलेश कुशवाहा, नयन पाठक और सचिन शर्मा शामिल बताए जा रहे हैं — के साथ दुकान में घुस आया। अचानक हमला करते हुए उन्होंने फरसा, तलवार, डंडे और बंदूक से हमला बोल दिया।

इस हमले में राकेश तिवारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि राहुल तिवारी को गंभीर हालत में शहडोल मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां इलाज शुरू होने से पहले ही उसने भी दम तोड़ दिया। तीसरा युवक सतीश अभी भी गंभीर रूप से घायल है और इलाज चल रहा है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मौत से पहले राकेश तिवारी ने अपने मोबाइल कैमरे में बयान रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने हमलावरों के नाम लेकर पूरी घटना का खुलासा किया। उसने बताया कि अनुराग शर्मा और उसके साथियों ने न केवल हमला किया, बल्कि दुकान में तोड़फोड़ और लूटपाट भी की।

मृतकों के पिता पुरुषोत्तम तिवारी ने बताया कि विवाद उनके 99 डिसमिल जमीन के पट्टे को लेकर चल रहा था। साल 2021 में भी आरोपी अनुराग शर्मा ने उन्हें पिस्टल दिखाकर धमकाया था, जिसका मामला तब दर्ज हुआ था। परिवार का आरोप है कि उसी रंजिश के चलते यह दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया।

दीपावली की रौशनी में डूबे गांव बलबहरा पर अब मातम का साया छा गया है। दोनों बेटों के शव देख परिजन बदहवास हैं। पूरा गांव गमगीन है और हर कोई प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।

शहडोल के एसपी रामजी श्रीवास्तव ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला जमीनी विवाद का है। मुख्य आरोपी अनुराग शर्मा और उसके कुछ साथियों को हिरासत में लिया गया है, बाकी फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

त्योहार की खुशियां देखते-देखते खून में डूब गईं — दीपों की जगह अब शोक के दीये जल रहे हैं, और गांव के हर चेहरे पर सिर्फ एक सवाल है:

“कब थमेगा इंसानी नफरत का यह खूनी खेल?”