Updated On: 23 Oct, 2025

मौत का तांडव चला तब भी पुलिस सोई रही — बलबहरा में दो भाइयों की बेरहमी से हत्या, जनता ने सड़क पर उतरकर मांगा इंसाफ

लेखन - देवकांत मिश्रा
बलबहरा गांव की रात मौत की चीखों में डूब गई। बुधवार देर रात दो सगे भाइयों की बेरहमी से हत्या ने पूरे गांव को झकझोर दिया। सुबह होते ही मातम का सन्नाटा गुस्से में बदल गया। गांव की महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सड़क पर उतर आए। उनकी आंखों में आंसू थे, और जुबान पर एक ही सवाल — “जब मौत नाच रही थी, तब पुलिस कहाँ थी?”

परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की सूचना पुलिस को समय पर दे दी गई थी, लेकिन दो घंटे बीत जाने के बाद भी कोई मदद नहीं पहुंची। जब तक पुलिस मौके पर आई, तब तक दोनों भाइयों की सांसें थम चुकी थीं। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी पूरे समय गांव में खुलेआम घूमते रहे और परिवार वालों को धमकाते रहे।

गांव की गलियों में मातम पसरा था। महिलाएं सिर पर दुपट्टा डाले जमीन पर बैठकर रो रही थीं। कई बच्चे अपनी मां की गोद में सिसक रहे थे। परिजनों ने बताया कि मृतक भाइयों पर हमला अचानक नहीं हुआ था — आरोपी कई दिनों से धमकी दे रहे थे, जिसकी जानकारी पुलिस को दी गई थी, मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

गांव वालों ने कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद ये हादसा टल सकता था। घटना के बाद ग्रामीणों ने सड़क पर चक्काजाम कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि यह सिर्फ दो मौतों का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी है।

घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने देर रात जांच शुरू की और आरोपियों की तलाश में टीम गठित की। अधिकारियों ने ग्रामीणों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ का गुस्सा कम नहीं हुआ। ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हो।

गांव के एक बुजुर्ग ने कहा, “हम हर बार पुलिस पर भरोसा करते हैं, पर जब सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है, वही गायब हो जाती है।”

यह घटना सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उस तंत्र की सच्चाई है जो वक्त पर जागता नहीं — और जब तक जागता है, तब तक कई घरों के चिराग बुझ चुके होते हैं।