Updated On: 02 Nov, 2025

कीचड़, गड्ढे और पानी से जूझता रसमोहनी, रोड से गायब हुआ विकास, सड़क की जगह अब नाले का राज! प्रशासन मूक दर्शक!

शहडोल ज़िले के रसमोहनी गांव से सगराटोला तक की सड़क अब सड़क कम, एक खुले नाले जैसी बन चुकी है। सड़क की हालत ऐसी है कि यह पहचानना मुश्किल है कि कभी यहां पक्की सड़क थी भी या नहीं। जगह-जगह गड्ढे, कीचड़ और बहता पानी—इन सबने मिलकर इस मार्ग को मौत का रास्ता बना दिया है। पैदल चलना तो दूर, दोपहिया वाहन चलाना तक जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।


रसमोहनी बाजार से लेकर गांव की गलियों तक, हर जगह यही नज़ारा है। कीचड़ में फंसे वाहन, गिरते बच्चे, और उछलते पानी से गुजरते लोग—ये दृश्य रोज़ के हो चुके हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि “सड़क नहीं, नाला है यह!” सड़क की बदहाली देख ऐसा लगता है जैसे क्षेत्र के जनप्रतिनिधि सड़क पर चलकर नहीं बल्कि हवा में उड़कर गांव आते-जाते हों, क्योंकि कोई भी सच्चा जनप्रतिनिधि इस हालात को देखकर चुप नहीं बैठ सकता।


लोगों का गुस्सा अब उबाल पर है। गांववासियों ने पहले ही चुनाव का बहिष्कार किया था, फिर भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी। दर्जनों बार 181 पोर्टल पर शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, लेकिन नतीजा—शून्य! विभाग के अधिकारी शिकायतें सुनने के बजाय उन्हें वापस लेने की धमकियां दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि PWD विभाग के कुछ कर्मचारियों ने ग्रामीणों से शिकायत हटाने तक को कहा, वरना कोई काम नहीं होगा।


यह सिर्फ एक सड़क की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम की सड़ांध की झलक है। बारिश के बाद की हालत तो और भयावह है—पानी और कीचड़ का ऐसा समंदर जिसमें हर पल किसी बड़े हादसे का खतरा मंडरा रहा है।


रसमोहनी से सगराटोला तक की जनता का कहना है कि अब “विकास” शब्द सुनकर उन्हें हंसी आती है। बार-बार शिकायतों के बावजूद विभाग और जनप्रतिनिधियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। गांववाले अब बस यही कह रहे हैं—“जब तक सड़क नहीं, तब तक वोट नहीं!”


रसमोहनी से सगराटोला तक की ये सड़क अब सिर्फ मिट्टी और पानी का ढेर नहीं रही, यह बन चुकी है जनता के सब्र की आखिरी परीक्षा। अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो अगली बारिश इस सड़क को नहीं, पूरे सिस्टम को बहा ले जाएगी।