Updated On: 04 Nov, 2025

हाईकोर्ट का बड़ा झटका! शहडोल कलेक्टर पर 2 लाख का जुर्माना, जानिए किस गलती से फंसे अफसर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह पर सख्त रुख अपनाते हुए उन पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने पाया कि कलेक्टर ने एक मामले में झूठा हलफनामा दाखिल किया था, जिससे न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश की गई। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई एक विवादित कार्रवाई से जुड़ा है।

जानकारी के मुताबिक, शहडोल जिले में एक युवक पर एनएसए के तहत कार्रवाई की गई थी। इस पर उसकी मां ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि उसके बेटे को राजनीतिक दबाव में गलत तरीके से एनएसए में निरुद्ध किया गया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान जब मामले की रिपोर्ट मांगी, तो शहडोल कलेक्टर की ओर से एक हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें कई तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था।

सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने दस्तावेजों की जांच की, तो पाया गया कि कलेक्टर द्वारा दी गई जानकारी सत्य से मेल नहीं खाती। इस पर जस्टिस विवेक अग्रवाल की खंडपीठ ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह “न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़” है। कोर्ट ने कहा कि किसी अधिकारी को यह अधिकार नहीं कि वह न्यायालय को गुमराह करे या झूठे तथ्य प्रस्तुत करे।

अदालत ने कहा कि यह कदम सरकारी विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने कलेक्टर पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए आदेश दिया कि यह राशि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (State Legal Services Authority) में जमा की जाए। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी अधिकारी द्वारा ऐसा कृत्य दोहराए जाने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। कलेक्टर की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार वे फैसले के खिलाफ रीव्यू याचिका दाखिल करने की तैयारी में हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला एक मिसाल बन सकता है, जिससे भविष्य में अधिकारी अदालत के समक्ष किसी भी दस्तावेज़ या हलफनामे को लेकर अधिक सतर्क रहेंगे।