रसमोहनी बीट में फूला अवैध रेत कारोबार — पुलिस संरक्षण में चल रहा धंधा, प्रशासन बना मौन दर्शक
जैतपुर (शहडोल)। क्षेत्र के रसमोहनी बीट में इन दिनों रेत का अवैध परिवहन खुलेआम किया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तितरा और रसमोहनी नदी क्षेत्र से रोजाना दर्जनों ट्रैक्टर व हाइवा वाहन रेत लेकर निकल रहे हैं। यह पूरा कारोबार कथित रूप से बीट प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह के संरक्षण में फल-फूल रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की जानकारी के बिना इतने बड़े पैमाने पर रेत का परिवहन संभव ही नहीं है।
रात के अंधेरे में नदी किनारे लगती है कतारें —
बताया जा रहा है कि रात होते ही तितरा और रसमोहनी नदी के किनारे ट्रैक्टर लंबी कतारें लग जाती हैं। जेसीबी मशीनों से रेत निकाली जाती है और फिर उसे आस-पास के इलाकों में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत जैतपुर थाना और वन विभाग तक पहुंचाई, मगर कार्रवाई के नाम पर हर बार सिर्फ खानापूर्ति की गई।
स्थानीयों में गुस्सा, प्रशासन पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि पहले कभी इतनी खुलेआम रेत की लूट नहीं होती थी। लेकिन बीट प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह के पदस्थ होने के बाद से अवैध खनन ने रफ्तार पकड़ ली है। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों का कहना है कि पुलिस का संरक्षण न होता तो यह धंधा एक दिन भी नहीं चल पाता। रसमोहनी, तितरा, और बारिगवां के आसपास रेत की निकासी लगातार जारी है।
रेत माफिया के हौसले बुलंद
सूत्रों का कहना है कि रेत माफिया के ट्रैक्टर बिना नंबर प्लेट और फर्जी परमिट लेकर हर दिन नदी किनारे पहुंचते हैं। इनमें से कई वाहनों पर स्थानीय पुलिस की सीधी मिलीभगत के आरोप हैं। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि जब वे विरोध करते हैं तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है या झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है। इससे ग्रामीण चुपचाप अवैध गतिविधियों को देखते रहते हैं।
प्रशासन की भूमिका संदिग्ध
जैतपुर थाना क्षेत्र में हो रहे इस अवैध कारोबार पर प्रशासनिक अमला भी चुप है। खनिज विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस—तीनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर बचने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध रेत खनन और परिवहन पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके बावजूद रसमोहनी और तितरा में धड़ल्ले से रेत उठाई जा रही है।
सूत्रों का दावा — मोटी रकम का खेल
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हर दिन रेत परिवहन से मोटी कमाई होती है। बताया जाता है कि एक ट्रैक्टर रेत निकलवाने के एवज में तय “रकम” पुलिस और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है। यही वजह है कि कार्रवाई के नाम पर हर बार सिर्फ दिखावा किया जाता है। जब कभी शिकायतें ऊपर तक पहुंचती हैं, तब एक-दो ट्रैक्टर पकड़कर मामला शांत कर दिया जाता है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी हैरान करने वाली
रसमोहनी बीट के इस मुद्दे पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी मौन हैं। चाहे जनपद सदस्य हों या पंचायत स्तर के अधिकारी—किसी ने भी अब तक खुलकर इस अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज नहीं उठाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो कुछ महीनों में तितरा और रसमोहनी नदियां पूरी तरह सूख जाएंगी।
पर्यावरण पर संकट
रेत का अंधाधुंध दोहन न केवल नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर रहा है, बल्कि इससे जलस्तर में भी गिरावट आ रही है। स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी से नदी पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ रहा है। लगातार हो रहे अवैध खनन से नदी तट कट रहे हैं, जिससे बाढ़ और भूमि धंसान का खतरा बढ़ गया है।
जनता ने मांगी उच्चस्तरीय जांच
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि बीट प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह और संबंधित अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।
अंत में सवाल यह उठता है —
क्या कानून सिर्फ आम नागरिकों के लिए है? क्या अवैध रेत माफियाओं को पुलिस संरक्षण हासिल है? और आखिर कब तक रसमोहनी की रेत सरकारी संरक्षण में लूटी जाती रहेगी? प्रशासन को चाहिए कि तत्काल प्रभाव से इस अवैध कारोबार पर रोक लगाकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करे, ताकि कानून का भय और जनता का भरोसा दोनों कायम रह सके।

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