Updated On: 19 Nov, 2025

अब मृत्यु भोज बंद! 15,000 लोगों की भीड़, घंटे भर की खामोशी… फिर हुआ बड़ा ऐलान

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का सोरम गांव इस समय देशभर की सुर्खियों में है। तीन दिनों तक चली सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत मंगलवार को अचानक ऐसे फैसलों के साथ समाप्त हुई कि लोगों की आंखें खुली की खुली रह गईं। सुबह की सामान्य शुरुआत दोपहर तक एक ऐतिहासिक मोड़ ले चुकी थी, जब पंचायत ने सर्वसम्मति से 11 सख्त सामाजिक सुधार प्रस्ताव पारित कर दिए। करीब 15,000 किसान, खाप चौधरी और विभिन्न राज्यों से पहुंचे प्रतिनिधि इस निर्णायक पल के साक्षी बने।

सोरम में चली यह पंचायत सिर्फ बैठक नहीं थी—यह उन कुरीतियों के खिलाफ सामूहिक आवाज थी, जो धीरे-धीरे समाज के भीतर घर बना चुकी हैं। हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर से आए खाप प्रतिनिधियों ने सामाजिक ढांचे में पड़ी दरारों पर खुलकर चर्चा की। मंच पर जब भी कोई चौधरी उठकर अपनी राय रखता, भीड़ में एक गहरी खामोशी दौड़ जाती—मानो आने वाले निर्णयों की आहट सभी महसूस कर रहे हों।

तीन दिनों की बहस के बाद सबसे पहले जिस मुद्दे पर एकमत राय बनी, वह था दहेज प्रथा का उन्मूलन। इसके बाद सभा ने बिना किसी विरोध के मृत्यु भोज (तेरहवीं) पर रोक लगाने का प्रस्ताव भी पारित कर दिया। पंचायत का मानना है कि इन रस्मों में होने वाला अनावश्यक खर्च गरीब परिवारों को कर्ज और तंगी की तरफ धकेल देता है।

इसके अलावा कन्या भ्रूण हत्या, नशाखोरी, गौ-संरक्षण, पर्यावरण बचाव, और समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने जैसे विषयों पर भी त्वरित सहमति बनी। लेकिन वह प्रस्ताव जिसने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी, वह था—लिव-इन रिलेशनशिप का विरोध और लव मैरिज या कोर्ट मैरिज के लिए माता-पिता की अनुमति अनिवार्य करना।

पर्यावरण को लेकर भी एक अनोखा निर्णय लिया गया—अब जन्मदिन या किसी परिजन के निधन पर एक पेड़ लगाना अनिवार्य होगा। पंचायत ने इन सभी प्रस्तावों के पालन के लिए एक विशेष कमेटी भी गठित कर दी है, जो समय-समय पर हर गांव में इसकी निगरानी करेगी।