Updated On: 05 Dec, 2025

बनसुकली में श्रीराम कथा का अलौकिक आयोजन — 7 से 15 दिसंबर तक दिव्य आध्यात्मिक माहौल

बनसुकली।
“भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी…”
श्रीरामचरितमानस की सुरम्य चौपाइयों से पूरे बनसुकली क्षेत्र में इन दिनों आध्यात्मिक उल्लास और धार्मिक उत्साह का अद्भुत वातावरण व्याप्त है। मेन ब्योहारी रोड, बनसुकली में 7 दिसंबर से 15 दिसंबर 2025 तक होने जा रही श्रीराम कथा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष जोश देखने को मिल रहा है।

पूज्या रश्मि मिश्रा जी करेंगी कथा वाचन

इस पावन कथा का वाचन वृन्दावन की सुप्रसिद्ध कथावाचिका पूज्या रश्मि मिश्रा जी द्वारा किया जाएगा। उनका आगमन बनसुकली क्षेत्र के लिए एक विशेष सौभाग्य के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूज्या जी की वाणी में वह आध्यात्मिक तेज और भक्ति का दिव्य स्वर है, जो हर आयु वर्ग में धर्म, संस्कार और भक्ति भाव को जागृत करता है।

क्षेत्र में बना दिव्य धार्मिक माहौल

कथा के आयोजन को लेकर ग्रामीणों, युवाओं और विशेषकर बच्चों में असाधारण आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है। गांव-गांव में धर्ममय वातावरण, भक्ति गीतों का स्वर और रामचरितमानस पाठ की गूंज ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया है। आयोजन समिति के अनुसार यह कार्यक्रम केवल कथा नहीं, बल्कि समाज को एकसूत्र में पिरोने वाला भक्ति और सांस्कृतिक महोत्सव बन चुका है।

6 दिसंबर को भव्य कलश शोभायात्रा

कथा प्रारंभ होने से एक दिन पूर्व 6 दिसंबर को विशाल कलश शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें सैकड़ों माताएँ–बहनें पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगी। शोभायात्रा बनसुकली से प्रारंभ होकर मुख्य मार्गों से गुजरते हुए पूरे क्षेत्र में धार्मिक पवित्रता और भक्ति की छटा बिखेरेगी। महिलाओं में इस यात्रा को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

आसपास की पंचायतों से आएंगे हजारों श्रद्धालु

आयोजन समिति ने बताया कि इस पावन कथा में आसपास की कई ग्राम पंचायतों—
कुंडाटोला, मुंदरियाटोला, चरहेट, पोंडी, पथरवार, भर्री, महुआटोला, डोम्हार, पहड़िया, छकता तथा सीधी—
से भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

हर पंचायत में समितियों द्वारा घर-घर जाकर निमंत्रण पत्र वितरित किए जा रहे हैं, ताकि कोई भी श्रद्धालु इस पवित्र भक्ति पर्व से वंचित न रह जाए।

समापन

“मंगल भवन अमंगल हारी,
द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी…”
जैसी पावन चौपाइयों की मधुर गूँज के बीच होने जा रहा यह महाआयोजन निश्चित रूप से पूरे क्षेत्र को भक्ति, सौहार्द, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक एकता के प्रकाश से आलोकित करने जा रहा है।