धान खरीदी में बड़ा खुलासा — रिकवरी झेल रहे प्रभारियों ने ही बना ली अपनी समिति, एक सीज़न में 60–70 लाख का मुनाफा कमा रहे धान खरीदी केंद्र प्रभारी
जैतपुर/शहडोल
धान खरीदी में बड़ा खेल उजागर!
रिकवरी झेल रहे प्रभारियों ने परिवार–रिश्तेदारों के नाम पर बनाई समिति — सरकारी केंद्रों से लेकर समूहों तक तुलाई पर ‘खास लोगों’ का कब्ज़ा, किसानों की बारी लटकाई**
*जैतपुर(खबरTAP विशेष रिपोर्ट)*
मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचल में धान खरीदी सिस्टम की वास्तविक स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ताजा खुलासे के मुताबिक, जिन धान खरीदी प्रभारियों पर पिछले वर्ष की अनियमितताओं को लेकर सरकारी रिकवरी की कार्रवाई जारी है, उन्हीं लोगों ने इस वर्ष अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए एक और रास्ता निकाल लिया — अपने परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर नई समिति बनाकर धान खरीदी का पूरा सिस्टम खुद के नियंत्रण में ले लिया।
स्थानीय लोगों और किसानों ने आरोप लगाया कि है धान खरीदी प्रभारी एक सीजन में 50से 60 लाख रुपये की खुद की कमाई कर लेते है,
जबकि वास्तविक किसानों को तुलाई के लिए कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
सरकारी खरीदी केंद्रों की बदहाली — खुले में पड़ा धान, मशीनें बंद, किसानों की उम्मीदें ठंडी
जैतपुर के आसपास के सरकारी खरीदी केंद्रों का जायजा लेने पर तस्वीर बेहद चिंताजनक दिखी।
धान के विशाल ढेर खुले में पड़े हैं
सुरक्षा और संरक्षण का अभाव
पंजीयन-तुलाई की प्रक्रिया धीमी
किसानों को सुबह से शाम तक इंतजार
किसानों का कहना है कि केंद्र में जानबूझकर धीमी तुलाई की जा रही है।
एक किसान ने कहा—
“जैसे ही आम किसानों की बारी आती है, मशीन खराब बता दी जाती है। लेकिन रात होते ही खास लोगों की तुलाई फिर से शुरू हो जाती है।”
समूहों में भी पकड़ — ‘सिस्टम चलाने’ का पूरा इंतजाम!
सूत्रों के मुताबिक, महिला स्व-सहायता समूहों के नाम पर चल रही खरीदी में भी परिवार जुड़े हुए हैं।
वही लोग समूहों के संचालन, खरीद और तुलाई की प्रक्रिया का निर्देशन कर रहे हैं, जिन पर पहले से अनियमितताओं का दाग लगा हुआ है।
स्थानीय लोग बताते हैं—
“समूह का नाम सिर्फ कागज पर है, काम तो उन्हीं का चलता है जो पहले भी खरीदी में मनमानी करते रहे हैं।”
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोग सामाजिक प्रभाव का सहारा लेकर केंद्रों पर धाक जमाए हुए हैं।
शिकायत है कि यही दबदबा तुलाई को “खास लोगों” तक सीमित कर देता है।
एक बुजुर्ग किसान ने बताया—
“हमारे लिए नियम अलग, इनके लिए अलग। किसान लाइन में खड़ा रहे, पर इनकी गाड़ी आए तो तुलाई तुरंत शुरू हो जाती है।”
किसानों में गहरा आक्रोश — “हमारी तुलाई रुकी, और दोषी लाखों का धान खरीदें?”
किसानों के मुताबिक, जो लोग पहले की गड़बड़ियों की वजह से रिकवरी झेल रहे हैं, उन्हें खरीदी की कमान मिलना ही गलत है।
किसानों ने कहा—
“जिन्होंने सिस्टम को नुकसान पहुंचाया, वही अब सिस्टम को चला रहे हैं। किसान केवल तमाशा देखते रह जाते हैं।”
एक सीजन में 50से 60लाख तक कीकमाई पर प्रशासन चुप — बड़ा सवाल उठ खड़ा
किसानों के अनुसार, व सर्वे के अनुसार 50- 60लाख तक एक धान खरीदी केंद्र प्रभारी की निजी कमाई है पर कोई पूछताछ न होने से यह संदेह और गहरा हो गया है कि पूरा सिस्टम “मैनेज” कर लिया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है—
“यह सिर्फ खरीदी नहीं, बल्कि सत्ता और नेटवर्क का खेल है, जिसमें किसान सबसे बड़ा पीड़ित बनता जा रहा है।”
प्रशासन से 5 प्रमुख मांगें — जांच तेज नहीं हुई तो बड़ा विरोध!
किसानों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से निम्न मांगें उठाई हैं:
1. रिकवरी झेल रहे प्रभारियों की भूमिका की तुरंत जांच
2. परिवार–रिश्तेदारों की समिति के गठन की वैधता की समीक्षा
3. सरकारी और समूह खरीदी में पारदर्शिता
4. तुलाई की समान गति — VIP तुलाई बंद हो
5. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और जिम्मेदारी तय
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ख़बर TAP की विशेष टिप्पणी
धान खरीदी किसानों की मेहनत का मूल्य तय करने का सबसे महत्वपूर्ण मंच है। यदि इसे निजी हितों, रिश्तेदारी और रसूख के सहारे चलाया जाने लगे, तो पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी। प्रशासन को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

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