ख़बर से तिलमिलाया रेत माफिया, धमकी भरे फोन में खुद कबूला अवैध कारोबार—माइनिंग विभाग और जैतपुर थाना को खुली चुनौती
जैतपुर /तितरा..
क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन पर ख़बर सामने आते ही रेत माफिया इस कदर बौखला गया कि उसने अपनी ही ज़ुबान से पूरे अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। ख़बर Tap की टीम को किए गए एक धमकी भरे फोन कॉल में रेत माफिया ने न सिर्फ़ अवैध रेत परिवहन करने की बात खुलेआम कबूली, बल्कि यह भी स्वीकार किया कि एक-दो नहीं, बल्कि दस-दस गाड़ियाँ लगातार अवैध रेत ढोने में लगाई जाती हैं। इस बातचीत की ऑडियो अब वायरल हो चुकी है, जिसने माइनिंग विभाग और जैतपुर थाना की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
फोन कॉल में माफिया का अंदाज़ साफ़ तौर पर कानून को चुनौती देने वाला था। वह मीडिया को डराने की कोशिश करता सुनाई देता है और खुले शब्दों में कहता है—
“हिम्मत है तो खदान पर आओ।”
यह बयान न सिर्फ़ धमकी है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के मुंह पर तमाचा भी है। सवाल यह है कि जिस व्यक्ति को पुलिस, माइनिंग विभाग और प्रशासन का कोई डर नहीं, उसे आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है?
ऑडियो में रेत माफिया जिस बेखौफ लहजे में अवैध रेत परिवहन की बात स्वीकार कर रहा है, उससे यह साफ़ हो जाता है कि जैतपुर क्षेत्र में अवैध खनन कोई चोरी-छिपे होने वाला काम नहीं रहा। यह एक संगठित अपराध का रूप ले चुका है, जो खुलेआम नदियों को छलनी कर रहा है और शासन को भारी राजस्व नुकसान पहुंचा रहा है। रोज़ाना दस गाड़ियों का संचालन यह दर्शाता है कि यह खेल बिना स्थानीय प्रशासन की जानकारी के संभव ही नहीं।
सबसे गंभीर सवाल माइनिंग विभाग की भूमिका को लेकर उठता है। जिन क्षेत्रों से रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है, वहां विभागीय अमला आखिर क्या कर रहा है? क्या निरीक्षण सिर्फ़ काग़ज़ों तक सीमित है? क्या अवैध खनन की शिकायतें फाइलों में दबा दी जाती हैं? यदि नहीं, तो फिर इतनी बड़ी संख्या में रेत से लदे वाहन कैसे बेरोकटोक सड़कों पर दौड़ रहे हैं?
जैतपुर थाना भी इस पूरे मामले में संदेह के घेरे में है। थाना क्षेत्र से होकर जब अवैध रेत से भरी गाड़ियाँ गुजरती हैं, तो क्या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं होती? या फिर जानकारी होते हुए भी अनदेखी की जाती है? माफिया की जुबान से निकले शब्द—“दस गाड़ी चलती है”—अपने आप में पुलिस की सक्रियता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह हैं।
मीडिया को दी गई धमकी इस बात का संकेत है कि रेत माफिया अब इतना ताकतवर हो चुका है कि वह पत्रकारों को भी डराने से नहीं हिचक रहा। यह केवल ख़बर Tap पर हमला नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा हमला है। यदि सच्चाई दिखाने पर मीडिया को धमकियां मिलेंगी, तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कैसे सुरक्षित रहेगा?
ख़बर Tap यह स्पष्ट करता है कि धमकियों से डरने वाला नहीं है। सच्चाई सामने लाना पत्रकारिता का धर्म है और यह लड़ाई जारी रहेगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस खुले चैलेंज के बाद क्या ठोस कार्रवाई करता है, या फिर रेत माफिया का हौसला यूं ही बुलंद रहने दिया जाएगा। जनता जवाब चाहती है—और इस बार जवाब टालना आसान नहीं होगा।

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