Updated On: 15 Dec, 2025

धान खरीदी केंद्र में प्रभारी–समूह की मिलीभगत, किसानों से खुलेआम लूट

धान खरीदी केंद्रों पर किसानों को राहत देने के लिए बनाई गई व्यवस्था अब खुद किसानों के शोषण का जरिया बनती जा रही है। ताजा मामला यह है कि धान खरीदी केंद्र के प्रभारी और वहां कार्यरत स्वयं सहायता समूह के लोग आपसी मिलीभगत से किसानों को लूट रहे हैं। नियमों और निर्देशों को ताक पर रखकर अतिरिक्त तौल, धमकी और धान रिजेक्ट करने का डर दिखाकर किसानों से जबरन धान वसूला जा रहा है।

किसानों का आरोप है कि केंद्र पर 40 किलो प्रति बोरी की निर्धारित तौल के बजाय उनसे 41 किलो से अधिक धान भरवाया जा रहा है। जब किसान इस पर सवाल उठाते हैं तो प्रभारी और समूह के लोग एक ही भाषा बोलते नजर आते हैं। साफ कहा जाता है कि “जो नियम हम बता रहे हैं, वही मानना पड़ेगा, वरना धान की खरीदी नहीं होगी।” मजबूरी में किसान अपनी उपज कम दाम और ज्यादा तौल के साथ देने को विवश हैं।

सूत्रों के मुताबिक, धान खरीदी केंद्र पर तौल से लेकर पर्ची कटाने, लोडिंग और भुगतान तक हर प्रक्रिया प्रभारी और समूह की आपसी सहमति से संचालित हो रही है। समूह के लोग किसानों पर दबाव बनाते हैं और प्रभारी आंखें मूंदे रहते हैं या फिर खुलकर उनका साथ देते हैं। यही वजह है कि किसानों की कोई शिकायत दर्ज नहीं हो पा रही और न ही कोई कार्रवाई होती दिख रही है।

किसानों का यह भी कहना है कि जो किसान अतिरिक्त धान देने से मना करता है, उसका धान घंटों लाइन में खड़ा रखा जाता है। कभी नमी ज्यादा बताई जाती है तो कभी गुणवत्ता खराब होने का बहाना बनाकर धान रिजेक्ट करने की धमकी दी जाती है। इस डर के माहौल में किसान चुपचाप शोषण सहने को मजबूर हैं।

धान खरीदी जैसी संवेदनशील व्यवस्था में इस तरह की मिलीभगत न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सरकार के किसान हितैषी दावों की भी पोल खोलती है। यदि प्रभारी और समूह ही किसानों के हक पर डाका डालेंगे तो किसान किससे न्याय की उम्मीद करें?

अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और खाद्य विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए। प्रभारी और संबंधित स्वयं सहायता समूह की भूमिका की जांच हो, अतिरिक्त तौल और अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगे तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। तभी किसानों का भरोसा व्यवस्था पर कायम रह पाएगा, वरना धान खरीदी केंद्र किसानों के लिए राहत नहीं, लूट का अड्डा बनते चले जाएंगे।