जैतपुर धान खरीदी केंद्र पर किसानों से खुली लूट, केंद्र प्रभारी की मिलीभगत से व्यापारी का हजारों कुंटल धान खपाया जा रहा
जैतपुर।
सरकारी योजनाओं के नाम पर किसानों को राहत देने का दावा करने वाली धान खरीदी व्यवस्था जैतपुर में किसानों के लिए अभिशाप बनती जा रही है। यहां के धान खरीदी केंद्र पर किसानों से खुलेआम लूट का खेल चल रहा है। आरोप है कि केंद्र प्रभारी की मिलीभगत से दिनेश नामक व्यक्ति किसानों के धान पर डाका डाल रहा है, जबकि दूसरी ओर व्यापारियों का हजारों कुंटल धान नियमों को ताक पर रखकर खपाया जा रहा है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि केंद्र पर दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। अगर किसी किसान का धान थोड़ा भी खराब, नमी वाला या दाने में हल्की सी भी कमी दिखी, तो उसे तुरंत यह कहकर लौटा दिया जाता है कि “धान मानक के अनुरूप नहीं है।” किसान कई-कई दिनों तक लाइन में खड़े रहते हैं, ट्रैक्टर का किराया देते हैं, मजदूरी चुकाते हैं, फिर भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।
वहीं दूसरी तरफ, आरोप है कि व्यापारियों का धान बिना किसी सख्त जांच के खरीदा जा रहा है। कई हजार कुंटल व्यापारी का धान केंद्र से पास किया जा चुका है। नमी, गुणवत्ता और ग्रेडिंग जैसे नियम इन व्यापारियों के लिए सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। यह सब समूह के कर्णधार दिनेश और केंद्र प्रभारी की कथित सांठगांठ से हो रहा है।
जांच पहले से, फिर भी वही खेल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इस धान खरीदी केंद्र को लेकर जांच और कार्रवाई पहले से चल रही है, तो फिर केंद्र प्रभारी अब तक अपने पद पर कैसे बना हुआ है? जांच के दौरान भी यदि यही अनियमितताएं जारी हैं, तो यह साफ संकेत देता है कि या तो कार्रवाई सिर्फ दिखावा है, या फिर प्रभावशाली लोगों का संरक्षण इस पूरे खेल को बचाए हुए है।
किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारी की भूमिका सिर्फ एक कर्मचारी की नहीं, बल्कि पूरे घोटाले की रीढ़ की तरह है। धान किसका लिया जाएगा, किसे लौटाया जाएगा, किसका तौल कम दिखेगा और किसका ज्यादा—इन सबका फैसला प्रभारी और दिनेश मिलकर करते हैं।
किसानों पर आर्थिक और मानसिक मार
इस लूट का सबसे बड़ा शिकार गरीब और मध्यम वर्ग के किसान हैं। किसान बताते हैं कि एक बार धान लौट जाने पर उसे दोबारा सुखाना, साफ कराना और फिर केंद्र तक लाना बेहद खर्चीला हो जाता है। कई किसानों को मजबूरी में अपना धान औने-पौने दामों पर प्राइवेट व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है।
किसानों का यह भी कहना है कि जो किसान आवाज उठाता है, उसे अगली बार और ज्यादा परेशान किया जाता है। कभी स्लॉट नहीं मिलता, कभी बारदाना खत्म बता दिया जाता है, तो कभी तौल मशीन खराब होने का बहाना बना दिया जाता है।
प्रभारी का क्या रोल?
सबसे अहम सवाल यही है कि जब जांच और कार्रवाई की बात कही जा रही है, तब भी केंद्र प्रभारी की भूमिका क्या है?
क्या वह सिर्फ मूक दर्शक है?
या फिर पूरे खेल का सक्रिय हिस्सा?
यदि प्रभारी की जानकारी के बिना व्यापारी का हजारों कुंटल धान खपाया जा रहा है, तो यह प्रशासनिक विफलता है। और यदि प्रभारी की जानकारी व सहमति से यह सब हो रहा है, तो यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार और किसानों के साथ धोखा है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
जैतपुर के किसानों ने मांग की है कि:
केंद्र प्रभारी और दिनेश की भूमिका की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो
जांच पूरी होने तक केंद्र प्रभारी को तत्काल हटाया जाए
अब तक खरीदे गए व्यापारी के धान की दोबारा जांच हो
किसानों का लौटाया गया धान प्राथमिकता से खरीदा जाए
अगर समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो किसानों का आक्रोश किसी भी समय बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। सरकारी धान खरीदी व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को सुरक्षा देना था, लेकिन जैतपुर में यही व्यवस्था किसानों की खून-पसीने की कमाई लूटने का जरिया बनती जा रही है।

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