कानून बेड़ियों में, माफिया आज़ाद! अफसर अली को पुलिस का खुला संरक्षण, तितरा–कुनुक नदी का सीना छलनी
जैतपुर | एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
तितरा–कुनुक नदी आज सिर्फ पानी की धारा नहीं रही, बल्कि पुलिस–माफिया गठजोड़ की खुली गवाही बन चुकी है। रेत माफिया अफसर अली बेखौफ होकर नदी का सीना छलनी कर रहा है और सवाल यह नहीं कि अवैध खनन हो रहा है, सवाल यह है कि इतने खुलेआम अपराध के बावजूद पुलिस आंख मूंदे क्यों बैठी है?
सूत्रों के मुताबिक अफसर अली को स्थानीय थाना प्रभारी का सीधा और सक्रिय संरक्षण प्राप्त है। यही वजह है कि रात व दिन नदी किनारे ट्रैक्टर–ट्रॉलियों की फौज उतर आती है। बिना रॉयल्टी, बिना परमिट और बिना किसी डर के रेत की लूट जारी रहती है। कानून मानो अफसर अली के दरवाजे पर आकर दम तोड़ देता है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जैसे ही किसी कार्रवाई की भनक लगती है, पुलिस पहुंचने से पहले ही माफिया का नेटवर्क अलर्ट हो जाता है। यह महज़ संयोग नहीं, बल्कि अंदरूनी सेटिंग का पुख्ता संकेत है। यही कारण है कि छोटे ट्रैक्टर मालिकों पर तो केस दर्ज होते हैं, वाहन जब्त किए जाते हैं, लेकिन अफसर अली के काफिले पर हाथ डालने की हिम्मत कोई नहीं करता।
नदी का जलस्तर लगातार गिर रहा है, किनारे की ज़मीन धंस रही है, किसानों की फसलें खतरे में हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग सिर्फ फाइलों में कार्रवाई कर रहे हैं। पर्यावरण की हत्या और सरकारी राजस्व की खुली लूट के बावजूद थाना स्तर पर सन्नाटा पसरा है।
सबसे बड़ा सवाल—
क्या थाना प्रभारी कानून का रक्षक है या रेत माफिया का रिश्तेदार वा साझेदार?
क्या अफसर अली को इसलिए खुली छूट है क्योंकि “ऊपर तक सेटिंग” है?
यदि पुलिस और प्रशासन अब भी चुप्पी साधे रहे, तो यह साफ हो जाएगा कि तितरा–कुनुक नदी नहीं, बल्कि कानून का अस्तित्व खत्म किया जा रहा है। जनता की मांग है कि तत्काल इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, थाना प्रभारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अफसर अली के पूरे नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई हो।
अब भी अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मान लिया जाएगा कि
नदी माफिया नहीं मार रहा, बल्कि सिस्टम खुद नदी का गला घोंट रहा है।

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