Updated On: 05 Jan, 2026

दुर्गा स्व सहायता समूह की ‘दादागिरी’, दूसरे सेक्टर में घुसकर किसानों की खुली लूट

मुख्यमंत्री आगमन से पहले फूटा धान घोटाला, चन्नौडी बना भ्रष्टाचार का पोस्टर बॉय
खाद्य विभाग या बिचौलिया विभाग? चन्नौडी धान केंद्र में नियमों की अर्थी
धान घोटाले ने तोड़ी हदें, जैतपुर–भाटिया में उबाल, मुख्यमंत्री से सीधी शिकायत की तैयारी
चन्नौडी/जैतपुर।
सरकारी धान खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए राहत होनी थी, लेकिन चन्नौडी धान खरीदी केंद्र अब भ्रष्टाचार, दबंगई और बिचौलिया राज का प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन से ठीक पहले इस केंद्र पर चल रहे धान घोटाले ने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
दूसरे सेक्टर में घुसकर ‘दादागिरी’, नियमों को रौंद रहा दुर्गा स्व सहायता समूह
गंभीर आरोप हैं कि दुर्गा स्व सहायता समूह अपने निर्धारित सेक्टर को छोड़कर दूसरे सेक्टर में प्रवेश कर धान खरीदी के नाम पर किसानों से अवैध वसूली और मनमानी तौल कर रहा है।
सवाल यह है कि—
किसके आदेश से यह समूह सेक्टर की सीमा तोड़ रहा है?
क्या यह सब खाद्य विभाग की मौन सहमति से हो रहा है?
खबर लगते ही धमकी, केंद्र प्रभारी की दबंग जुबान
मामला उजागर होते ही बिचौलियों में खलबली मच गई। सूत्रों के अनुसार, केंद्र पर मौजूद एक जिम्मेदार व्यक्ति ने खुद को केंद्र प्रभारी बताते हुए कहा—
“मैं केंद्र प्रभारी हूं, जो चाहे कर सकता हूं।” किसानों से यह बात सामने आया कि किसानों के साथ अभद्रता करता है और अपने आप को केंद्र प्रभारी बता रहा , साथ ही बड़े बड़े अखबारों को 500में खरीदने दावा भी किया जा रहा जिसका संपूर्ण साक्ष्य मौजूद
यह बयान बताने के लिए काफी है कि केंद्र पर कानून नहीं, बल्कि दबंगई और संरक्षण चल रहा है।
त्रिभुवन–चंदन–प्रभारी: धान खरीदी या दलाली का अड्डा?
धान खरीदी केंद्र में त्रिभुवन, चंदन और केंद्र प्रभारी की भूमिका बेहद संदिग्ध मानी जा रही है।
इन लोगों को केंद्र के अंदर किसने और किस अधिकार से प्रवेश दिया?
क्या ये खाद्य आपूर्ति विभाग से जुड़े लोग हैं या बिचौलियों के एजेंट?
किसानों का आरोप है कि उनका धान मामूली कारण बताकर लौटा दिया जाता है, जबकि व्यापारियों और बिचौलियों का धान बिना जांच के खरीदा जा रहा है।
किसानों का शोषण, कार्रवाई शून्य
लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक
न तो दुर्गा स्व सहायता समूह को ब्लैकलिस्ट किया गया,
न ही केंद्र प्रभारी और संलिप्त लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई।
यह स्थिति साफ संकेत देती है कि भ्रष्टाचार को ऊपर से संरक्षण प्राप्त है।
जैतपुर–भाटिया में उबाल, मुख्यमंत्री से सीधी शिकायत की तैयारी
धान घोटाले ने अब राजनीतिक और जनआंदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया है। जैतपुर और भाटिया क्षेत्र में किसानों का आक्रोश चरम पर है। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान
धान खरीदी केंद्र के घोटाले की सीधी शिकायत की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि—
मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर चन्नौडी यूं ही भ्रष्टाचार का पोस्टर बॉय बना रहेगा?