Updated On: 09 Oct, 2025

सरोगेसी कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पुराने भ्रूण फ्रीज कराने वाले दंपतियों को मिली राहत, उम्र सीमा लागू नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सरोगेसी कानून को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है, जिससे उन दंपतियों को बड़ी राहत मिली है जिन्होंने जनवरी 2022 से पहले भ्रूण फ्रीज कराया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की आयु सीमा लागू नहीं होगी।
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह फैसला तीन दंपतियों की याचिकाओं पर सुनाया, जिनकी सरोगेसी प्रक्रिया कानून लागू होने से पहले शुरू हुई थी। अदालत ने कहा कि “अगर सरोगेसी प्रक्रिया कानून लागू होने से पहले शुरू हो चुकी है और भ्रूण फ्रीज या ट्रांसफर की प्रक्रिया जारी थी, तो ऐसे मामलों में आयु सीमा की शर्त लागू नहीं होगी।”
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राहत केवल उन दंपतियों को दी जाएगी जिन्होंने वास्तव में सरोगेसी की प्रक्रिया शुरू की थी, केवल क्लिनिक जाने वालों पर यह आदेश लागू नहीं होगा। अदालत ने कहा कि अगर सरोगेट बच्चा अधिनियम लागू होने के 10 महीनों के भीतर जन्म लेता है, तो उस दंपति पर भी आयु की पाबंदी लागू नहीं होगी।
यह फैसला उन 3 दंपतियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्होंने सरोगेसी अधिनियम में निर्धारित ऊपरी आयु सीमा — महिलाओं के लिए 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 55 वर्ष — को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि उन्होंने 2021 के कानून लागू होने से पहले ही भ्रूण फ्रीज करा लिया था, इसलिए नए नियम उन पर लागू नहीं होने चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि अन्य दंपति भी इसी स्थिति में हैं, तो वे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं और इस फैसले का लाभ उठा सकते हैं।