Updated On: 13 Oct, 2025

पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच बढ़ा तनाव: कौन दे रहा है हथियार, किसकी सेना ज्यादा ताकतवर?

रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास संघर्ष के बाद अब दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी तनाव चरम पर है। सीमा पर 11 और 12 अक्टूबर की रात हुई गोलीबारी में 100 से ज्यादा पाकिस्तानी और 200 से अधिक अफगान लड़ाकों के मारे जाने की खबर है। दोनों देशों के बीच जंग जैसे हालात बन चुके हैं।
अफगानिस्तान में तालिबान शासन आने के बाद से देश की सैन्य क्षमता सीमित रही है। ग्लोबल फायरपावर-2025 की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान 145 देशों में 118वें स्थान पर है। तालिबान ने करीब 2 लाख सैनिकों की सेना बनाई है, जो मुख्य रूप से गुरिल्ला युद्ध में माहिर हैं। उनके पास सोवियत काल के पुराने टैंक, बख्तरबंद वाहन और अमेरिकी सेना द्वारा छोड़े गए हथियार ही मौजूद हैं।
तालिबान के पास 50 से ज्यादा मेन बैटल टैंक, 300 बख्तरबंद वाहन और लगभग इतनी ही संख्या में तोपें हैं। हवा में मारक क्षमता सीमित है। अमेरिका से मिले कुछ ए-29 सुपर टुकैनो हल्के विमान, 30 हेलीकॉप्टर और कुछ ड्रोन ही उनकी वायुसेना का हिस्सा हैं। मिसाइल सिस्टम पुराने हैं और तकनीकी रूप से कमजोर माने जाते हैं।
दूसरी ओर पाकिस्तान की सैन्य ताकत अफगानिस्तान से कहीं अधिक है। ग्लोबल फायरपावर-2025 की रैंकिंग में पाकिस्तान दुनिया में 12वें स्थान पर है। पाकिस्तान के पास करीब 17 लाख सैन्यकर्मी हैं। उसकी एयरफोर्स में 1399 विमान, थलसेना में 1839 टैंक और नौसेना के पास 121 युद्ध संसाधन हैं।
हथियारों की सप्लाई की बात करें तो पाकिस्तान को ज्यादातर हथियार चीन से मिलते हैं। वह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार आयातक देश है, जिसने 80 फीसदी से ज्यादा हथियार चीन से खरीदे हैं। अमेरिका ने उसे एफ-16 जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट दिए हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार और बैलिस्टिक मिसाइलें भी हैं, जिनमें चीन की तकनीकी मदद रही है।
अफगानिस्तान अभी भी पुराने हथियारों और सीमित संसाधनों पर निर्भर है, जबकि पाकिस्तान आधुनिक तकनीक और परमाणु शक्ति से लैस है। यही कारण है कि मौजूदा तनाव में पाकिस्तान का पलड़ा सैन्य दृष्टि से भारी माना जा रहा है।